प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे एल नीनो पर गंभीर चेतावनियाँ.. नवंबर, दिसंबर में अधिकतम प्रभाव होने का अनुमान
क्या दुनिया एक और बड़े मौसम संकट की ओर बढ़ रही है? प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में हो रहे बदलाव एक बार फिर एल नीनो के प्रभाव पर चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। आने वाले महीनों में यदि यह मौसमीय घटना और अधिक मजबूत होती है, तो दुनिया के कई क्षेत्रों में गंभीर तापमान, सूखा, भारी बारिश जैसी असाधारण परिस्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना है, इस पर चर्चा चल रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि एल नीनो मजबूत होता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक मौसम प्रणाली पर महत्वपूर्ण रूप से पड़ेगा। विशेष रूप से नवंबर और दिसंबर में इसका प्रभाव गंभीर रूप धारण करने की संभावना है, जो चिंताजनक है। हालांकि, यह कितनी गंभीर होगी, यह हाल के समुद्र-जलवायु डेटा के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न बदल सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में सूखा स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा होगा। कृषि, जल संसाधन, बिजली की मांग, खाद्य आपूर्ति प्रणालियों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
सबसे चिंताजनक पहलू तापमान में वृद्धि है। पहले से ही वैश्विक औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर को छू रहा है, ऐसे में यदि एक मजबूत एल नीनो की स्थिति बनती है, तो गर्मी और अधिक तीव्र हो सकती है। इससे हीटवेव, जंगलों में आग, जल संकट जैसी समस्याएँ कई क्षेत्रों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि, 'मानव इतिहास में सबसे भयावह सुपर एल नीनो निश्चित' है, यह कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। एल नीनो की ताकत, अवधि, और वैश्विक प्रभाव को मौसम संस्थाएँ लगातार मॉनिटर कर रही हैं। आने वाले महीनों में प्रकाशित होने वाले नवीनतम अनुमानों से वास्तविक स्थिति पर और अधिक स्पष्टता मिलेगी।
क्या वैश्विक मौसम प्रणाली के लिए एक और बड़ा परीक्षण अनिवार्य है? एल नीनो के मजबूत होने के संकेतों के बीच, विश्व देश मौसम की स्थितियों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। आने वाला नवंबर-दिसंबर का समय इस घटना का कितना प्रभाव पड़ेगा, यह तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण चरण बन सकता है।
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