76 सेकंड में एक कार.. विश्व निर्माण पर ड्रैगन का नियंत्रण!
बीजिंग: हाईटेक निर्माण क्षेत्र में चीन की तेजी विश्व औद्योगिक क्षेत्र में नए समीकरणों की ओर ले जा रही है। एक समय अमेरिका और यूरोप का प्रभुत्व रहा, अब ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स, और उन्नत निर्माण क्षेत्रों में चीनी कंपनियाँ भारी निवेश कर रही हैं और उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रही हैं।
बीजिंग में स्थित शियाओमी की ‘हाइपरफैक्टरी’ इस बदलाव का उदाहरण है। इस प्लांट को दो वर्षों में 3 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं.. जहां सैकड़ों उन्नत रोबोट उत्पादन प्रक्रिया को संचालित कर रहे हैं। यहाँ केवल 76 सेकंड में एक कार तैयार हो रही है। मानव श्रम पर निर्भरता को कम करते हुए ऑटोमेशन के माध्यम से उत्पादन की गति बढ़ाना चीन की रणनीति प्रतीत होती है।
विश्व निर्माण मूल्य में चीन का हिस्सा पहले ही 32 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। 2010 की तुलना में यह लगभग दोगुना है। हालांकि, इस हाईटेक क्रांति का एक और पहलू भी है। 2013 की तुलना में चीन के निर्माण क्षेत्र में लगभग 1.8 करोड़ नौकरियाँ कम हुई हैं। ऑटोमेशन और रोबोटिक्स का विस्तार इसके प्रमुख कारणों में से एक बताया जा रहा है।
अब चीन के रोबोट आधारित ऑटोमोबाइल प्लांट्स लागत के मामले में भी प्रतिस्पर्धियों को चुनौती दे रहे हैं। अमेरिका और यूरोप की तुलना में निर्माण लागत 25-30 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है। कम लागत, तेज उत्पादन, और उन्नत तकनीक—ये तीनों मिलकर चीन की कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ा रहे हैं।
इसका प्रभाव ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 2025 में चीन की ऑटो निर्यात 57 लाख वाहनों तक पहुँच जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्ट कारों, रोबोटिक्स, और ऑटोमेटेड फैक्ट्रियों में भारी निवेश के साथ चीन विश्व निर्माण आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।
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