इंद्रकीलाद्रि पर भव्यता से आयोजित श्री गंगा, पार्वती (दुर्गा) समेथ मल्लेश्वरुल चैत्रमास कल्याण ब्रह्मोत्सव भक्तिभाव के साथ जारी हैं। 29 मार्च से 5 अप्रैल तक आयोजित इस उत्सव के तहत दूसरे दिन कार्यक्रम धूमधाम से हुए। सुबह 8 बजे से पंडितों ने मूल मंत्र हवन किए। इसके बाद शाम 5 बजे से 6 बजे तक औपासन, बलिहरण, हारति, मंत्र पुष्पं, प्रसाद वितरण कार्यक्रम भक्तिपूर्वक आयोजित किए गए।
रावण वाहन पर मल्लेश्वर स्वामी का विहार चैत्रमास कल्याण ब्रह्मोत्सव के तहत शाम 5 बजे मल्लेश्वर महामंडप से श्री गंगा, पार्वती (दुर्गा) समेथ मल्लेश्वर की रावण वाहन सेवा आंगन-आंगन भव्यता से प्रारंभ हुई। पुराणों के अनुसार रावण लंका का अधिपति, पौलस्त्य ब्रह्म वंश का और परम शिव का महान भक्त था। शिव के अंश से जन्मे रावण ने प्रतिदिन शिव आराधना, अभिषेक करने के बाद ही भोजन ग्रहण करने की पुराणोक्ति है। इतना बड़ा शिव भक्त रावण, परम शिव को कैलाश से लंका लाने का संकल्प लेकर कठोर तपस्या करता है, और शिवतांडव स्तोत्र के साथ शिव को प्रसन्न करता है, यह आध्यात्मिक विश्वास है।
परंपरागत कलारूपों के साथ वाहन सेवा के लिए भक्तिरस वातावरण प्रख्यात रावण वाहन पर स्वामी और अम्बा विराजमान थे, जबकि तंबे, कोलाट नृत्य, ताल भजन जैसे पारंपरिक कलारूपों ने भक्तों को आकर्षित किया। वेद मंत्रों और मंगल वाद्ययंत्रों के बीच वाहन सेवा श्रेणी महा मंडप से प्रारंभ होकर कनकदुर्ग नगर, रथ सेंटर, ब्राह्मण सड़क, कोटापेट, सामारंग चौक, मेन बाजार मार्गों से होकर जारी रही।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर के अधिकारियों ने मंदिर के अध्यक्ष बोरा राधाकृष्ण (गांधी), ईओ वीके शीना नायक नारियल फोड़कर पूजा कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में स्थानाचार्य वी. शिव प्रसाद शर्मा, ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य पी. राघवराजू, ए. श्रीनिवासराव आदि ने भाग लिया।
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