हाईकोर्ट के फैसले से खैरताबाद सीट खाली.. तीन पार्टियों में उम्मीदवारों की तलाश.. बदलते राजनीतिक समीकरण
हैदराबाद: खैरताबाद में राजनीतिक गर्मी अचानक बढ़ गई है। विधायक दानाम नागेंद्र को अयोग्य घोषित करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले से निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव के लिए रास्ता खुल गया है। 2024 लोकसभा चुनावों में बीआरएस विधायक दानाम नागेंद्र का कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिकंदराबाद से चुनाव लड़ना कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने खैरताबाद विधानसभा सीट को खाली घोषित किया। हालांकि, इस फैसले को चुनौती देते हुए दानाम नागेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया है।
पिछले चुनावों के आंकड़े अब मुख्य चर्चा बन गए हैं।
2023 विधानसभा चुनावों में बीआरएस की ओर से चुनाव लड़ने वाले दानाम नागेंद्र ने 67,368 वोटों के साथ जीत हासिल की। कांग्रेस के उम्मीदवार पी. विजयारेड्डी को 45,358 वोट, जबकि भाजपा के उम्मीदवार चिंतला रामचंद्रारेड्डी को 38,094 वोट मिले। दानाम नागेंद्र ने 22,010 वोटों की बढ़त से जीत हासिल की। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए तीन पार्टियां अपनी ताकत का आकलन कर रही हैं।
भाजपा के लिए पिछले संसद चुनावों के परिणाम महत्वपूर्ण बन गए हैं।
सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को मिले समर्थन को पार्टी के नेता याद करवा रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रीय मुद्दे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व उस समय के चुनाव प्रचार में मुख्य रूप से छाया रहा। अब जबकि उपचुनाव पूरी तरह से स्थानीय राजनीति के चारों ओर घूमने की संभावना है, उम्मीदवार चयन, स्थानीय कैडर और बूथ स्तर की ताकत भाजपा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।
कांग्रेस खेमे में राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं।
दानाम नागेंद्र के साथ विजयारेड्डी के नाम भी निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में पहले से प्रमुखता से हैं। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संबंध, सरकारी योजनाएं, विकास मुद्दों को आगे बढ़ाने का प्रयास कांग्रेस में देखा जा रहा है। हालांकि, उपचुनाव में पार्टी की ओर से अंतिम उम्मीदवार कौन होगा, यह आधिकारिक रूप से तय होना बाकी है।
भाजपा के उम्मीदवार को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है।
2023 में चुनाव लड़ने वाले चिंतला रामचंद्रारेड्डी फिर से मैदान में उतरेंगे या नए चेहरे को मौका देंगे? यही अब पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बन गया है। दूसरी ओर, स्थानीय नेतृत्व, कैडर के साथ समन्वय, पिछले चुनावों में मिले वोटों को बनाए रखना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
बीआरएस के लिए यह उपचुनाव एक और महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकता है।
पिछले विधानसभा चुनावों में इसी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करने वाली पार्टी अब नए उम्मीदवार को मैदान में उतारने की स्थिति में है। तलसानी श्रीनिवास यादव परिवार से उम्मीदवार को उतारने के मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है, हालांकि इस पर आधिकारिक घोषणा आनी बाकी है। स्थानीय नेतृत्व से इस पर भिन्न राय होने की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में सुनाई दे रही है।
तीनों पार्टियों के लिए खैरताबाद अब प्रतिष्ठात्मक लड़ाई है। 2023 विधानसभा परिणाम एक बात हैं, जबकि उसके बाद के घटनाक्रम एक और बात बन गए हैं। दानाम नागेंद्र की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट के परिणाम, उपचुनाव का शेड्यूल, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समस्याएं, कैडर की ताकत—इन सभी मिलकर खैरताबाद के राजनीतिक समीकरणों को निर्धारित करेंगे। वर्तमान में "खैरताबाद किसका?" चर्चा हैदराबाद के राजनीतिक हलकों में गर्म विषय बन गई है।
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