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कालेश्वर पर असली सवाल यही है.. क्या इतना बड़ा प्रोजेक्ट सुरक्षित है?

कालेश्वरम परियोजना की सुरक्षा पर बढ़ते सवाल.. निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी खामियों, और लीकages पर विशेषज्ञों की स्पष्टता की आवश्यकता है। जनधन से निर्मित परियोजना की सुरक्षा ही प्रमुख है।

Telangana/karnataka

तेलंगाना में प्रतिष्ठित रूप से निर्मित कालेश्वरम परियोजना अब एक बार फिर गंभीर चर्चा का केंद्र बन गई है। हजारों करोड़ रुपये नहीं.. लाखों करोड़ों जनता के धन को खर्च कर बनाई गई इस विशाल जलस्रोत परियोजना की निर्माण गुणवत्ता, इंजीनियरिंग मानक, और सुरक्षा पर उठ रहे सवालों के लिए अब राजनीतिक उत्तर नहीं.. तकनीकी उत्तर चाहिए!

पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के कार्यकाल में कालेश्वरम परियोजना को तेलंगाना की जल आवश्यकताओं के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान के रूप में सरकार ने बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया। लेकिन समय के साथ परियोजना में महत्वपूर्ण संरचनाओं पर उठे तकनीकी मुद्दे, नुकसान, लीक, और प्रबंधन के मुद्दे परियोजना की सुरक्षा पर कई संदेह पैदा कर रहे हैं।

तालाब में बूँद गिरने पर ही खतरा.. फिर कालेश्वरम की स्थिति क्या है?

हमारे गांवों, कस्बों में छोटे तालाबों में भी बूँद गिरने पर, लीक होने पर लोग चिंतित हो जाते हैं। अचानक पानी छोड़ने पर निचले क्षेत्रों में फसलों, संपत्तियों, और अंततः जीवन को भी खतरा उत्पन्न होने की स्थितियाँ हमने कई बार देखी हैं।

ऐसे में विशाल स्तर पर निर्मित कालेश्वरम जैसी परियोजना में महत्वपूर्ण संरचनाओं को समस्या होने पर उसका प्रभाव कितना दूर तक जाएगा? आपातकालीन परिस्थितियों में निचले क्षेत्रों के लोगों की सुरक्षा के लिए कौन सी सुरक्षा प्रणाली है? यही अब सामान्य जनता में उठ रहे महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।

राजनीतियों को किनारे रखकर.. सुरक्षा पर उत्तर देना चाहिए!

कालेश्वरम के मामले में किसने गलती की? किसकी लापरवाही से समस्याएँ आईं? निर्माण के समय सभी डिज़ाइन, सामग्री, गुणवत्ता नियंत्रण, और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? प्रबंधन में कहीं कोई कमी है?

इन प्रश्नों के लिए सत्ताधारी पक्ष और विपक्ष का आपस में आरोप-प्रत्यारोप करना पर्याप्त नहीं है।

स्वतंत्र विशेषज्ञों की तकनीकी समीक्षा.. समग्र सुरक्षा ऑडिट.. जनता के लिए उपलब्ध रिपोर्ट.. यही अब आवश्यक है।

परियोजना में यदि कोई कमी है तो उसे छिपाना नहीं.. स्थायी समाधान दिखाना चाहिए। जिम्मेदारी जिन पर है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। भविष्य में पुनरावृत्ति न हो इसके लिए मजबूत सुरक्षा प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।

कालेश्वरम किसका है?

कालेश्वरम किसी एक राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं है। यह तेलंगाना की जनता के पैसे से निर्मित एक जन परियोजना है।

इसलिए असली प्रश्न “कालेश्वरम किसका प्रोजेक्ट?” नहीं है।

“कालेश्वरम कितना सुरक्षित है?” यही असली प्रश्न है। जनता के धन से निर्मित इतनी विशाल परियोजना के मामले में सुरक्षा पर यदि एक प्रतिशत भी संदेह है तो उसे वैज्ञानिक रूप से समाप्त करने की जिम्मेदारी सरकार की है।

कालेश्वरम को राजनीतिक युद्धभूमि के रूप में नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखने का समय आ गया है। जनता को सच चाहिए। तकनीकी आधार पर उत्तर चाहिए। जिम्मेदारी किसकी है, यह स्पष्ट होना चाहिए।

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